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आचार्य श्री १०८ चन्द्र सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश के सागर जिलान्तर्गत मालथोन ग्राम में धर्मानुरागी श्री निर्मल कुमार जी जैन के सुसंपन्न ,सेवाभावी ,धर्म निष्ठ परिवार में श्रावण कृष्णा ६ संवत २०२४ दिनांक ७ जुलाई १९६७ को एक होनहार बालक का जन्म हुआ ।बालक का नाम श्री मुकेश कुमार रखा गया।आपकी माता जी का नाम श्रीमती मुन्नी बाई जैन है।आपके २ छोटे भाई राजेश कुमार व् विकास कुमार और२ बहिने रजनी कुमारी व् सरिताकुमारी है।बचपन से ही बालक मुकेश कुमार विरक्त प्रकृति का रहा है।आपकी दादी माँ कहती थी कि मुकेश जब गर्भ में था तो इनकी माता जी को देवगति के स्वप्न दिखा करते थे ।किसी ने ठीक ही कहा है "पूत के पाँव पालने में दिख जाते है " और यह कहावत आचार्य श्री पर भली भांति चरितार्थ होती है ।आपने १७ वर्ष की उम्र तक स्कूली शिक्षा प्राप्त की ।आरंभिक शिक्षा के समय स्कूल से अपना बस्ता रखकर कभी कभी जंगल में जाकर ध्यान करते थे।

 

संक्षिप्त परिचय

जन्म: श्रावण कृष्णा ६ संवत २०२४ दिनांक ७ जुलाई १९६७
जन्म नाम : महेश कुमार जैन
जन्म स्थान : ग्राम-मालथोन ,सागर ,मध्यप्रदेश
माता जी नाम : श्रीमती मुन्नी बाई जैन
पिताजी नाम : श्री निर्मल कुमार जी जैन
ऐलक दीक्षा : सन १९८५
ऐलक दीक्षा स्थान : फिरोजाबाद , उत्तर प्रदेश
ऐलक दीक्षा गुरु : मुनि संभव सागर जी
मुनि दीक्षा : ३० -०८ -१९८५
मुनि दीक्षा स्थान :  
मुनि दीक्षा गुरु : मुनि संभव सागर जी
आचार्य पद : ०४ -१० -१९८८
आचार्य पद स्थान : खनियाधाना , जिला : शिवपुरी , मध्य प्रदेश
आचार्य पद प्रदाता : आचार्य कुन्थु सागर जी की उपस्थिति में

एक बार आपके गाँव में पूज्य मुनिश्री १०८ निर्वाण सागर जी महाराज का पदार्पण हुआ।मुनि श्री से प्रभावित होकर आपने उनके साथ चलने का निश्चय कर लिया।७ मार्च १९८३ को आपने मुनि श्री के साथ अतिशय क्षेत्र की यात्रा के लिए प्रस्थान किया।घरवालो को तथा गाँव वालो से तो यही कहा की में महाराज जी को अगले ग्राम तक छोड़ कर वापस लौट आऊंगा ।परन्तु डेढ माह तक जब आप वापस नहीं आये तो इनके बाबा श्री सुख लाल जी इन्हें खोजते हुए सागर में मिले और घर चलने को कहा तो आपने मना कर दिया । जब वे अधिक रोने लगे तो आपको दया आई और आप महाराज जी से स्वीकृति लेकर घर पहुंचे ।घर में हाथ पैर धोकर रात्रि विश्राम मंदिर में ही किया तथा दुसरे दिन शाम को महाराज श्री के पास सागर पहुच गए ।सागर से विहार कर मुनि श्री का थुवोन जीमे चातुर्मास हुआ। चातुर्मास में अस्वस्थ होने के कारन दशलक्षण में घर पर ही रहे।उसके बाद १ क्षुल्लक के साथ तीन मूर्ति पहुचे वहां से कल्याण मति माता जी के साथ वापस मालथोन आ गए और दूसरी प्रतिमा धारण की।पुन: माता जी के साथ हस्तिनापुर पहुचे । वहां मुनि संभव सागर जी से सात प्रतिमा धारण की।फिर आपने वहरण जिला आगरा में दिनांक ५/५/१९८५ को ऐलक दीक्षा ग्रहण की।वहां से आप जयपुर आये और श्री १०८ रयण सागर जी मुनि राज के दर्शन किये ।संसार असार है का चिंतवन कर चातुर्मास के समय ही दिनांक ३०/०८/१९८५ को मुनि दीक्षा ग्रहण की।महाराज जी के साथ चातुर्मास संपन्न कर उनके साथ मोजमाबाद पहुचे और यही गुरु का साथ छोड़ कर माधोराजपुरा में पदार्पण किया और दुसरे की चातुर्मास स्थापना की। अन्य जगह पर विहार करते हुए सन १९९२ में कुरावली में आचार्य श्री १०८ सन्मति सागर जी महाराज ने किशन गढ़ में दिनांक २५/०९/१९९२ को आपको उपाध्याय पद से विभूषित किया ।इसके बाद आप का नाम उपाध्याय चन्द्र सागर हो गए।इसके बाद आप आचार्य श्री के साथ संघ में रहे वर्ष १९९३ का चातुर्मास कापरेन में हुआ।

आचार्य श्री १०८ आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर)
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गणाधिपति श्री कुन्थु सागर जी महाराज
आचार्य श्री १०८ चन्द्र सागर जी महाराज

Aacharya Shri 108 Chandrasagar Ji Maharaj


Brief Introduction

Birth : Shravan Krishna 6 Samvat 2024 ,7 July 1967
Birth Name: Mukesh Kumar Jain
Birth Place : Gram -Maalthon,District-Sagar,M.P.
Mother's Name : Shrimati Munni Bai Jain
Father's Name Shri Nirmal Kumar Jain
Ailak Diksha : 05-05-1985
Ailak Diksha Place Vaharan,District -Aagra
Ailak Diksha Guru Muni Sambhav Sagar
Muni Diksha 30/08/1985
Muni Diksha Guru Muni Sambhav Sagar
Muni Diksha Place :
Upadhyaay Pad 25/09/1995
Upadhyaay Pad Guru Aacharya Shri 108 Sanmati Sagar Ji Maharaj
Upadhyaay Pad Place : Kishangarh
Aacharya Pad : 04-10-1988
Aacharya Pad Place : Khaniyadhaana,Shivpuri,MP
Aacharya Pad Pradata : In presence of Gandharacharya Shree Kunthusagar Ji


Aacharya Shri 108 Aadisagar Ji Maharaj (Anklikar)
Aacharya Shri 108 Mahaveer Kirti Ji Maharaj
Gandharacharya Shri 108 Kunthu Sagar Ji Maharaj
Acharya Shri 108 Chandra Sagar Ji Maharaj