आचार्य श्री १०८ देशभूषण जी महाराज


संक्षिप्त परिचय

जन्म: मग्सिर सुदी २,वि. सं.१९६२,सन १९०६
जन्म स्थान : कोथली(कर्णाटक)
नाम : श्री बालगौड़ा पाटिल
माता का नाम : श्रीमती अक्का देवी
पिता का नाम : श्री सत्यगौड़ा पाटिल
क्षुल्लक दीक्षा : रामटेक(महाराष्ट्र)
दीक्षा गुरु : आचार्य श्री जयकीर्ति जी महाराज
मुनि दीक्षा तिथि: जुलाई २५ , १९६३
मुनि दीक्षा स्थान : सिद्ध क्षेत्र कुन्थलगिरी जी
मुनि दीक्षा नाम : मुनि श्री देशभूषण जी
आचार्य पद : आचार्य श्री पायसागर जी की आज्ञानुसार
आचार्य पद तिथि: सूरत(गुजरात),1948
समाधि तिथि २८ मई,1987 गुरुवार
समाधि स्थल कोथली(कर्णाटक)
विशेष : राष्ट्र संत और भारत गौरव की उपाधि थी, सर्वप्रथम संसद भवन में जाकर जैन धर्म की अमिट छाप छोड़ी

देशभूषण सागरजी महाराज की वाणी में मधुरता थी ।उनका जीवन बड़ा ही सरल और दिव्यv था।वे अपने जीवन का १-१ क्षण आत्मचिंतन और परमार्थ में लगते थे।परम संयमी जीवन जीने वाले और सदा व्रत उपवास करने वाले आचार्य देशभूषण जी महाराज ने कई ग्रंथों का कन्नड़ से हिंदी अनुवाद किया है।और कई पुराने ग्रंथों का फिर से प्रकाशन करवाया है।आप किसी भी जिनालय में जाते तो वह शास्त्र भण्डार में जरुर जाते थे और वह के ग्रंथों केपुराने ग्रंथों को देख कर उनका प्रकाशन करते थे।आपकी रूचि पुराने ग्रंथों का पुन: प्रकाशन करने में थी।आपके शिष्यों में आचार्य विद्यानंद ,आचार्य बाहुबली सागर जी प्रमुख है।आचार्य विद्या सागर जी ने आपसे ब्रह्मचर्य व्रत और ज्ञान मति माता जी ने क्षुल्लिका दीक्षा आपसे ही ली थी। आचार्य शांति सागर जी के शिष्य पाय सागर जी के आशीर्वाद और आचार्य जय कीर्ति जी द्वारा आपको आचार्य पद से अलंकृत किया गया।आचार्य धर्मानंद सागर जी ने बताया की आचार्य देशभूषण जी महाराज एक आत्मनिष्ठ ,कर्तव्यपरायण ,उपसर्ग विजेता श्रेष्ठ संत थे।
आचार्य श्री १०८ शांति सागर जी महाराज
आचार्य श्री १०८ पाय सागर जी महाराज
आचार्य श्री १०८ जय कीर्ति जी महाराज
आचार्य श्री १०८ देशभूषण जी महाराज
श्वेतपिच्छाचार्य १०८ श्री विद्यानंद जी महाराज

Aacharya Shri 108 Deshbhushan Ji Maharaj


Brief Introduction

Birth :
1906
Birth Place: 
KOTHALPUR, BELGAON
Name :
SHRI BALGAUDA
Mothers Name :
Smt. Akka Devi
Father’s Name :
SHRI SATYAGAUDA JI
Kshullak Diksha :
RAMTEK TIRTH
Place of Muni Diksha :
KUNTHALGIRI
Muni Diksha Guru :
Acharyashri Jaikirti ji Maharaj
Aacharya Diksha :
Surat Gujraat
Acharya Pada Guru:
Aacharya Jai Kirit
LANGUAGES KNOWN
SANSKRIT, HINDI, ENGLISH, KANNADI, MARATHI
BOOKS LITERATURE AUTHORED
GURU SHISHYA SAMVAD, CHINMAY CHINTAMANI, AHINSA KA DIVYA SANDESH ETC. ALSO TRANSLATED MANY BOOKS FROM KANNADI TO HINDI, GUJARAT & MARATHI
OTHER DETAILS :
ESTABLISHED A GURUKUL (SCHOOL) IN AYODHYA, UTTAR PRADESH & A GRAND JINALAYA IN KOTHALI


Aacharya Shri 108 Shantisagar Ji Maharaj (Charitra Chakravarti)
Aacharya Shri 108 Paaysagar Ji Maharaj
Aacharya Shri 108 Jaikirti Ji Maharaj
Aacharya Shri 108 Deshbhushan Ji Maharaj
Aacharya Shri 108 Vidyanand Ji Maharaj