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आचार्य सम्राट श्री कुशाग्र नंदी जी महाराज

दिनांक १३ जून १९६७ मंगलवार के दिन श्रुतपंचमी पर स्व. श्री तवनाप्पा क्यादगे के घर में श्री अनंत कीर्ति क्यादगे का जन्म हुआ ,जिन्हें आज सारा भारत आचार्य सम्राट श्री कुशाग्र नंदी की गुरुदेव के रूप में जानता है।आपकी माता का नाम फुलावती था।हुपरी जिला कोल्हापुर में जन्मे अनंत कीर्ति क्यादगे के २ भाई थे जिनके नाम बाहुबली एवं बालासाहेब थे । आपकी शिक्षा प्राथमिक स्तर की हुई ।आप जाति के पंचम जैन थे। ५ दिसम्बर १९८२ को मात्र १५ वर्ष की उम्र में आपने गृह त्याग दिया।१४ जनवरी १९८३ को आपने बाल ब्रह्मचारी के रूप में ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया । आपने बुधवार २३ सितम्बर १९८५ को विजयादशमी के दिन ऐलक दीक्षा ग्रहण करी।रविवार ३० मार्च १९८६ रंगपंचमी के दिन आपकी मुनि दीक्षा ऐनापुर कर्नाटक में हुई । आपके दीक्षा गुरु गणाधिपति श्री कुन्थु सागर जी महाराज थे।

संक्षिप्त परिचय

जन्म: १३ जून १९६७
जन्म स्थान : हुपरी जिला कोल्हापुर
जन्म का नाम अनंत कीर्ति क्यादगे
माता का नाम : फुलावती
पिता का नाम : श्री तवनाप्पा क्यादग
बाल ब्रह्मचारी तिथि : १४ जनवरी १९८३
ऐलक दीक्षा तिथि : बुधवार २३ सितम्बर १९८५ को विजयादशमी के दिन
मुनि दीक्षा तिथि : रविवार ३० मार्च १९८६ रंगपंचमी के दिन
दीक्षा गुरु : गणाधिपति श्री कुन्थु सागर जी महाराज
मुनि दीक्षा स्थल : ऐनापुर कर्नाटक
आचार्य पद तिथि: २१ नवम्बर १९९६
आचार्य पद प्रदाता: गणाधिपति श्री कुन्थु सागर जी महाराज
समाधि स्थल :  
समाधि तिथि :  
विशेषता : आपको मराठी .कन्नड़ ,हिंदी,राजस्थानी ,संस्कृत ,प्राकृत,अर्धमागधी ,मारबाड़ी,गुजराती,उर्दू,अंग्रेजी,तुलू ,मलयालम ,मेवाड़ी , बघेली,बुन्देली,बिहारी ,छत्तीसगढी आदि अनेक बोली व् भाषाओँ का ज्ञान है।


पूज्य गुरुदेव को अभी तक विभिन्न पदवियों से विभूषित किया जा चुका है।
दिनांक ५ जून १९९२ को नैनवा (राज.)में आपको बालयोगी पद से विभूषित किया गया । २४ जनवरी १९९३ को महितपुर (म.प्र.)में विद्याधिपति,१३ नवम्बर १९९३ को चम्पावती नगरमे संस्कार रत्न ,२१ नवम्बर १९९६ को अतिशय योगी ,१४ जनवरी १९९५ को आचार्य कल्प ,१७ अक्टूबर १९९५ को युवाचार्य ,२१ नवम्बर १९९६ को आचार्य सम्राट ,६ फरवरी १९९७ को वात्सल्य रत्न,३० मार्च १९९७ को धर्म केशरी ,२० अप्रैल १९९७ को ज्ञान महर्षि ,१८ मई १९९७ को राष्ट्रीय गौरव ,१० नवम्बर १९९७ को तपश्वी रत्नाकर ,२७ अप्रैल १९९८ को भरत भूषण ,२७ जनवरी १९९९ को दिव्या पुण्य पुरुष ,२१ अगस्त १९९९ को कलियुग श्रवणकुमार ,२९ अक्टूबर २००१ को बुद्धि साम्राज्य ,१४ जनवरी २००१को प्रज्ञाश्रमण पदवी से विभूषित किया गया।आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी के साथ ही अनेको भाषाओँ के ज्ञाता भी है ।आपको मराठी .कन्नड़ ,हिंदी,राजस्थानी ,संस्कृत ,प्राकृत,अर्धमागधी ,मारबाड़ी,गुजराती,उर्दू,अंग्रेजी,तुलू ,मलयालम ,मेवाड़ी , बघेली,बुन्देली,बिहारी ,छत्तीसगढी आदि अनेक बोली व् भाषाओँ का ज्ञान है।आपकी लगभग २५ पुस्तके विभिन्न भाषाओँ में प्रकाशित हो चुकी है।


आचार्य श्री १०८ आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर)
आचार्य श्री १०८ महावीर कीर्ति जी महाराज
गणाधिपति श्री कुन्थु सागर जी महाराज
आचार्य श्री १०८ कुशाग्र नंदी जी महाराज

Aacharya Shri 108 Kusagra Nandi Ji Maharaj


Brief Introduction

Birth :
13 June 1967
Birth Place: 
Hupri District Kolahapur
Birth Name :
Anant Kirti
Mothers Name :
Fulavati
Father’s Name :
Shri Tavnappa
Brhamcharya Vrat :
14 Jan. 1983
Elak Diksha :
23 Sep. 1985 (Vijyadashmi)
Muni Diksha :
Sunday,30 March 1986 (Rangpanchmi)
Diksha Guru :
Shri Kunthusagar ji Maharaj
Place of Muni Diksha :
Ainapur ,Karnataka
Aacharya Pad :
21 Nov. 1996
Acharya Pad Pradata:
Shri Kunthusagar ji Maharaj
Samadhi Place:
 
Samadhi Tithi
 
Importance
Knowledge Different Languages Like Marathi,Kannad,Hindi,Urdu,English Etc.


Aacharya Shri 108 Aadisagar Ji Maharaj (Anklikar)
Aacharya Shri 108 Mahaveer Kirti Ji Maharaj
Gandharacharya Shri 108 Kunthu Sagar Ji Maharaj
Acharya Shri 108 Kushagranandi Ji Maharaj