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आचार्य श्री १०८ नेमिसागर जी महाराज


पूज्य आचार्य नेमि सागर महाराज का जन्म वर्तमान हरियाणा के अकेडा जिला गुडगाँव में १९०७ में हुआ।अल्पायु में माता पिता का देहावसान हो गया।आप ३ वर्ष की आयु में देहली के जोहरी लाल रणजीत सिंह जैन के यहाँ दत्तक पुत्र के रूप में आये जहा आपकी बुआ श्रीमती रिक्खी बाई लाला रणजीत सिंह जैन की बहन ने आपका लालन पोषण किया ।जब आप सिद्ध क्षेत्र शिखर जी की यात्रा पर गए थे तब वही बुआ के देहावसान का तार मिला ।इस घटना से आपकी वैराग्य भावना बढ़ गयी और आप घर नही लौटे ।आपने १९४० में ब्रह्मचर्य व्रत,१९४४ में क्षुल्लक दीक्षा और १९५६ में आचार्य श्री जय सागर जी से गुजरात के टाका टुन्का में मुनि दीक्षा ली।आपने गृहस्थ जीवन में आप सादा जीवन उच्च विचार और स्वाधीनता के पक्षधर थे।१९३१ में गाँधी जी द्वारा आहवान करने पर आप स्वाधीनता आन्दोलान्मे कूद पदेऔर ११माह लाहौर जेल में रहे।आप सदैव शुद्ध भोजन करते थे ।अत: जेल की रोटी नहीं खायी ।कई दिनों तक उपवास किया।अंत में जेल में ही शुद्ध भोजन की व्यवस्था हुई।१९८२ में आपका चातुर्मास सिकंदराबाद (बुलंद शहर ,उ.प्र.)में हुआ था।इस अवसर पर १ पुस्तक भी प्रकाशित हुई ।

संक्षिप्त परिचय

जन्म: सन १९०७
जन्म स्थान : अकेडा जिला गुडगाँव
नाम :  
माता का नाम :  
पिता का नाम :  
ब्रह्मचर्य व्रत : सन १९४०
क्षुल्लक दीक्षा : सन १९४४
मुनि दीक्षा गुरु : आचार्य श्री जय सागर जी
मुनि दीक्षा तिथि: सन १९५६
मुनि दीक्षा स्थान : गुजरात के टाका टुन्का
मुनि दीक्षा नाम : मुनि श्री १०८ नेमिसागर जी महाराज
समाधि :  
आचार्य पद त्याग :  


आचार्य श्री १०८ जय सागर जी
आचार्य श्री १०८ नेमि सागर जी महाराज