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आचार्य श्री १०८ सुविधिसागर जी महाराज 

परम पूज्य मुनिकुंजर, आचार्य श्री आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर) की सुविशुद्ध श्रमण परंपरा के वर्तमान पट्टाधीश तपश्चर्या-चक्रवर्ती परम पूज्य आचार्य श्री सुविधिसागरजी महाराज बाल ब्रह्मचारी है. आप परम पूज्य आचार्य श्री आदिसागरजी महाराज (अंकलीकर) परंपरा मैं है. और वर्तमान पट्टाधीश भी है. आपने दीक्षा परम पूज्य तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मतिसागरजी से प्राप्त की है. आपने कंप्यूटर के सहारे जैन ग्रंथों को इन्टरनेट पर ले जाने का कार्य किया. जैनों के ग्रन्थ जन जन को jaingranths .com पर उपलब्ध है. आपने कई जीवों को व्रत प्रदान किये, कई जीवो को आर्यिका व मुनि दीक्षा प्रदान की. लगभग १००० से आधिक ग्रंथों को ऑनलाइन करने का श्रेय आपको जाता है. पूर्वाचार्यों ने ताड पत्रों पर काम किया, भोज पत्रों पर भी काम हुआ और अब इस इक्कीसवीं सदी मैं कंप्यूटर पर भी ग्रन्थ आ गए. परम पूज्य परम्पराचार्य श्री सुविधिसागर जी ने पूर्व में 4 रस और गणिनी पद महोत्सव से नमक का आजीवन के लिए त्याग कर दिया है. परम पूज्य चारित्र-चक्रवर्ती, आचार्यश्री आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर) की सुविशुद्ध परम्परा के पट्टाचार्य परम पूज्य तीर्थभक्त-शिरोमणि, आचार्यश्री महावीरकीर्ति जी महाराज के पट्टाधीश परम पूज्य सिद्धान्त-चक्रवर्ती, आचार्यश्री सन्मतिसागर जी महाराज के उत्तराधिकारी परम पूज्य तपश्चजर्या-चक्रवर्ती, विद्या-वाचस्पति, आचार्यश्री सुविधिसागर जी महाराज ने आदेश दिया है कि अपने आपको सच्चे भारतीय कहलाने वाले नागरिकों को एक जनवरी को नवीन वर्ष नहीं मनाना चाहिये| भारत में विक्रम संवत्, शक संवत् अथवा वीरनिर्वाण संवत् से नवीन वर्ष प्रारम्भ होता है| ईसवी सन् को मानना न भारतीयता है, न किसी प्रकार का औचित्य| पड़ौसी के बेटे की वर्षागॉंठ हम अपने घरों में नहीं मनाते, फिर दूरवर्ती देश में स्थित ईसाईयों के देश में प्रचलित ईसवी सन् की वर्षागॉंठ हम कैसे मना सकते हैं?
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संक्षिप्त परिचय

जन्म: १९ मार्च १९७१
जन्म स्थान :  
जन्म का नाम  
माता का नाम :
पिता का नाम :
मुनि दीक्षा तिथि :
दीक्षा नाम : श्री सुविधिसागरजी
दीक्षा गुरु : आचार्य श्री १०८ सन्मति सागर जी महाराज
मुनि दीक्षा स्थल :
आचार्य पद तिथि: वर्ष 2004 में
आचार्य पद प्रदाता: पूज्य गुरुदेव तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मतिसागर जी के कर कमलों से पट्टाधीश पद.
समाधि स्थल :  
समाधि तिथि :  
विशेषता : कंप्यूटर के सहारे जैन ग्रंथों को इन्टरनेट पर ले जाने का कार्य किया


आचार्य श्री १०८ आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर)
आचार्य श्री १०८ महावीर कीर्ति जी महाराज
आचार्य श्री १०८ विमल सागर जी महाराज
आचार्य श्री १०८ सन्मति सागर जी महाराज
आचार्य श्री १०८ सुविधिसागर जी महाराज


Aacharya Shri 108 Suvidhi Sagar Ji

 


Brief Introduction

Birth :
19 March 1971
Birth Place: 
 
Birth Name :
 
Mothers Name :
 
Father’s Name :
 
Muni Diksha :
 
Diksha Name :
Shri Suvidhi Sagar
Diksha Guru:
Aacharya Sanmati Sagar
Place of Muni Diksha :
 
Aacharya Pad :
2004
Muni Diksha :
 
Acharya Pad Pradata:
Aacharya Sanamti Sagar
Samadhi Place:
 
Samadhi Tithi
 
Importance
Jain Granth Online. jaingranths .com


Aacharya Shri 108 Aadisagar Ji Maharaj (Anklikar)
Aacharya Shri 108 Mahaveer Kirti Ji Maharaj
Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Maharaj
Aacharya Shri 108 Sanmati Sagar Ji Maharaj
Aacharya Shri 108 Suvidhi Sagar Ji Maharaj