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आचार्य श्री १०८ विभव सागर जी महाराज

सामाजिक क्रांति के सूत्र धार आचार्य श्री १०८ विभव सागर जी महाराज युगांतरकारी साधू है।आप आध्यात्मिक ,सामाजिक एवं बहु आयामी प्रतिभा के धनीहै।आप के दुर्लभ चारित्रिक ऐश्वर्य ,सर्वतोमुखी प्रतिभा एवं धर्म मय जीवन ने ही आपको आगम का प्रकांड पंडित व् महँ संत बनाया है।आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज एक ऐसे आचार्य है जिनका सम्पूर्ण जीवन ज्ञान,तपस्या साहित्य के क्षेत्र काव्यात्मकता से प्रारंभ हुई और सम्पूर्ण काव्यात्मकता तपस्या का प्रतिरूप बन गयी।आपकी प्रवचन शैली प्रभावोत्पादक एवं ह्रदय ग्राही है आपने निरंतर स्वाध्याय करते हुए अपने ज्ञान को परिमार्जित व् विकसित किया है।माता श्रीमति गुलाब बाई और पिता लखमी चंद उस समय धन्य हो गये जब २३-१०-१९७६ को सागर जिले के किशनपुर में अशोक कुमार का जन्म हुआ तब यह कोई नहीं जानता था कि यह बालक आगे चल कर जिनवाणी का प्रतिनिधित्व करेगा

संक्षिप्त परिचय

जन्म: २३ अक्टूबर १९७६ – दिवाली
जन्म नाम : अशोक कुमार जैन “शास्त्री ”
जन्म स्थान : किसनपुरा (सागर ) ,म.प्र.
माता जी नाम : श्रीमती गुलाब बाई जैन
पिताजी नाम : श्री लक्ष्मी चंद जैन
वैराग्य : ९ अक्टूबर १९९४
क्षुल्लक दीक्षा : २८ जनवरी १९९५
क्षुल्लक दीक्षा स्थान : मंगल गिरी सागर
क्षुल्लक दीक्षा गुरु : आचार्य श्री १०८ विराग सागर जी महाराज
ऐलक दीक्षा : २३ फरवरी १९९६
ऐलक दीक्षा स्थान : देवेन्द्र नगर , सागर
ऐलक दीक्षा गुरु : आचार्य श्री १०८ विराग सागर जी महाराज
मुनि दीक्षा : १४ दिसंबर १९९८
मुनि दीक्षा स्थान : बरासों (भिंड)
मुनि दीक्षा गुरु : आचार्य श्री १०८ विराग सागर जी महाराज
आचार्य पद : ३१ मार्च २००७ महावीर जयन्ती
आचार्य पद स्थान : ओरंगाबाद महाराष्ट्र
आचार्य पद प्रदाता : आचार्य श्री १०८ विराग सागर जी महाराज

बाल्यकाल से ही तेजस्विता ,अनुशासन प्रियता ,सोम्यता ,धार्मिक द्रढता एवं धर्म प्रभावना से प्रभावित होकर इनके माता पिता द्वारा इन्हें लोकिक शिक्षा के साथ धर्मिक शिक्षा भी प्रदान की।मात्र ११ वर्ष की आयु में धार्मिक और लोकिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए सागर में गणेश वर्णी जी महाविद्यालय आ गए।इसी बीच आपका संपर्क आचार्य श्री विराग सागर जी से हुआ और सन १९९४ में आपके अन्दर वैराग्य के बीज अंकुरित होने लगे।१९९५ में सागर (म.प्र.) में ही मंगल गिरी परापकी भव्य क्षुल्लक दीक्षा हुइ उस समय आप मात्र २२ वर्ष के थे।
परम पूज्य विभव सागर जी महाराज वर्तमान युग के एक युवा द्रष्टा ,क्रांतिकारी विचारक ,जीवनसर्जक और आचार निष्ठ दिगंबर जैन आचार्य है।उनके प्रवचन व् काव्य जीवन की आंतरिक गहराइया,अनुभूतियों एवं साधना की ऊँचाइयों तथा आगम अद्भुत होते है।ये हमेशा जीवन की समस्याओं की गहनतम जड़ो का संस्पर्श करते है ।
गुरुदेव क्रांति के द्रष्टा है और परिष्कृत चिंतन के विचारों के प्रणेता है आपका जीवन क्रांति का श्लोक है।अप्रतिम प्रतिभा के धनी ,मुनि पथ के पथिक ,संत,सुकवि आचार्य श्री विभव सागर जी की लेखनी से अनवरत अनुपम साहित्य सृजित ही नहीं अपितु निस्रत हो रहा है।
गुरुदेव जी द्वारा कई कृतिया प्रकाशित हो चुकी है जिसमे माहराज जी द्वारा रचित अमृत गीता जो की आचार्य श्री ने ऐलक अवस्था में रची गयी थी एक अन्नोल करती है।इसमें आचार्य श्री ने आचार्य के ३६ मूल गुणों का वर्णन किया है।जिसमे हर एक पेज पर एक गुण का चित्र सहित वर्णन है।इसे आपने अपने गुरु विराग सागर जी को समर्पित किया है। कल्याण मंदिर गीता का हिंदी अनुवाद ऐसे समय किया है जब सुधि जन संस्कृत भाषा को जटिल मान कर भक्ति आराधना से वंचित हो रहे थे।गुरुदेव द्वारा किया गया यह कार्य भक्त को भगवान् से मिलाने का सूत्रपात करता है।यह काव्य दिग. और श्वेताम्बर दोनों लोगो द्वारा मान्य है।इसके आलावा आचार्य श्री द्वारा अन्य शास्त्रों का भी लेखन हुआ है।
२३ फरवरी १९९६ को आपकी ऐलक दीक्षा देवेन्द्र नगर में हुई।और बारासों भिंड में मुनि दीक्षा १४ दिसंबर १९९८ को व् महावीर जयंती के दिन ३१ मार्च २००७ को औरंगाबाद में आचार्य पद ग्रहण किया।ये तीनो दीक्षा भी आचार्य श्री १०८ विराग सागर जी के द्वारा दी गयी।
ऐसे परम तपस्वी ,वात्सल्यमयी ,विश्व वन्दनीय ,सत्यमार्ग प्रकाशक ,जिन आगम पथ प्रदर्शक ,माहवीर के अनुयायी ,कुन्दकुन्द परंपरा के नायक आचार्य श्री १०८ विभव सागर जी को मेरा त्रय बार नमोस्तु ,नमोस्तु ,नमोस्तु ।


आचार्य श्री १०८ आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर)
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आचार्य श्री १०८ विभव सागर जी महाराज

Aacharya Shri 108 Vimad Sagar Ji


Brief Introduction

Birth :  23 October 1976 – Diwali
Birth Name: Pandit Ashok Kumar Jain “Shastri”
Birth Place : Kisanpura (Sagar), M.P.
Mother's Name : Shrimati Gulab Bai Jain
Father's Name Shri Lakhmi Chand Jain
Vairagya : 9th October 1994
Kshullak Diksha :  28th January 1995
Kshullak Diksha Place: Sagar MangalGiri
Kshulak Diksa Guru Aacharya Shri 108 Virag Sagar Ji Maharaj
Ailak Diksha : 23 February 1996
Ailak Diksha Place Devendra Nagar, Sagar
Ailak Diksha Guru Aacharya Shri 108 Virag Sagar Ji Maharaj
Muni Diksha 14 Dec 1998
Muni Diksha Guru Aacharya Shri 108 Virag Sagar Ji Maharaj
Muni Diksha Place : Varosa,Bhind
Aacharya Pad : 31 March 2007 Mahaveer Jyanti
Aacharya Pad Place : Aurangabad, Maharashtra
Aacharya Pad Pradata : Aacharya Shri 108 Virag Sagar Ji Maharaj
Website :  

 


Aacharya Shri 108 Aadisagar Ji Maharaj (Anklikar)
Aacharya Shri 108 Mahaveer Kirti Ji Maharaj
Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Maharaj
Aacharya Shri 108 Virag Sagar Ji Maharaj
Aacharya Shri 108 Vibhav Sagar Ji Maharaj