Kshullak

खण्ड वस्त्र पहनते हैं: जिससे मस्तक ढ़के तो पैर न ढ़के, पैर ढ़के तो मस्तक न ढ़के।

Muni Shri 108 Dhyansagar Ji Maharaj क्षुल्लक श्री १०५ ध्यान सागर जी महारा