मुनि श्री १०८ चिन्मय सागर जी महाराज

१. आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज द्वारा वीर सेवादल के प्रथम दीक्षित मुनि ।
२. महान पारखी आचार्य श्री विद्या सागरजी महाराज से ब्रह्मचर्य से सीधी मुनि दीक्षा ,सदा साध्य से साधने की भावना रखने वाला साधक भीषण गर्मी,कडकडाती ठण्ड ,मुसलाधार वर्षा आदि में जंगल में रह सकता है और बाधा उपसर्ग ,परिषह सहन कर सकता है ।
३. जंगल वाले बाबा के नाम से प्रसिद्द ,जंगल में चातुर्मास करके जंगल में भी मंगल कर देते है ।
४.)जीयो और जीने दो को जिन्होंने जीवन में उतार लिया है वे ही जंगल की साधना कर सकते है लगता है जिस तरह भगवान् महावीर जीयो और जीने दो की साधना के लिए ही साधक बनकर जंगल गए थे ।उसी तरह मुनि श्री भी भगवान् महावीर का अनुकरण- अनुसरण करते हुए जंगल की साधना कर रहे है ।
५) आप अस्वस्थ होकर भी साधना कर रहे है ,सबके संघर्ष ,उत्कर्ष और साधना में सहयोग देना ही आपका जीवन बन गया है। आपका एक फेफड़ा (Lungs) समाप्त हो जाने पर भी आपका स्वस्थ्य एवं शरीर इतना क्षीण हो जाना कि सोने उठने पर भी तकलीफ होना ।ऐसे समय भी हजारों कि. मी. का विहार करना,आदेश का पालन करना और अपने मुनि व्रत में कोई दोष न आने देना अपने आप में बहुत बड़ा उदाहरण है।यह सब देख कर यहाँ विश्वास हो गया कि साधना केलिए शारीरिक शक्ति ही नहीं बल्कि अपने अंदरकी शक्ति की भी आवश्यकता होती है।
६.)आप द्रढ इच्छा शक्ति के धारी है ।संसार में आपके लिए कुछ भी असाध्य एवं असंभव नहीं है ,आप द्रढ संकल्पि भी है ,सहिष्णु वन समताधर शत्रु का भी कल्याण करने में कोई कसर नहीं छोड़ते ,आपके लिए समय कम पड़ता है ,जीवन छोटा लगता है ।आप बहुत कम समय में बड़े बड़े काम करने के लिए की क्षमता रखते है ,द्रढ संकल्पी मुनि श्री कठिन से कठिन कार्य का यदि संकल्प ले लेते है तो उनका मनोबल मेरु के सामान ऊँचा हो जाता है वह कार्य सहज और सरल दिखाई देने लगता है।
७.)आपने २४ दिन के अन्दर ३ पंचकल्याणक और गजरथ मोहत्सव करवाकर इतिहास बना दिया है।
ऐसे जंगल में रहकर साधना करने वाले जंगल वाले बाबा मुनि श्री १०८ चिन्मय सागर जी महाराज का ट्रे बार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु

संक्षिप्त परिचय

जन्म: ०६-०८-१९६१
जन्म  नाम: श्री धर्नेन्द्र कुमार जी जैन
जन्म स्थान:: जुगुल जिला बेलगाँव (कर्नाटक)
माता का नाम: श्रीमती हीरादेवी मोले
पिता का नाम: श्री अन्नपा मोले जी
शिक्षा : हायर सेकंड्री
ब्रह्मचर्य व्रत : सन १९८२
संघ प्रवेश : ९ जुलाई १९८७ अतिशय क्षेत्र थुवोन जी
मुनि दीक्षा:    
मुनि दीक्षा स्थान :   
दीक्षा गुरू: संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी
विशेष : आप जंगल में रहकर चतुर्थ कालीन मुनि की तरह चर्या करते है

गुरु
आचार्य श्री १०८ विद्या सागर जी महाराज

Muni Shri 108 Yog Sagar Ji Maharaj

 


Brief Introduction

Birth Date 06-06-1961
Birth Place Jugul District Belgaon
Birth Name Dharendra Kumar Jain
Mother's Name Shrimati Heera Devi Mole
Father's Name Shri Annapa Mole Ji
Eduction : Higher Secondry
Brhamcharya : 1982 Usmanabaad(Self)
Sangh Pravesh : 9 July 1987
Muni Diksha  
Muni Diksha Guru Aacharya Shri 108 Vidyasagar Ji Maharaj
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Aacharya
Aacharya Shri 108 Vidya Sagar Ji Maharaj