मुनि श्री १०८ प्रमाणसागर जी महाराज

झारखंड प्रान्त के हजारीबाग शहर में जन्मे मुनि श्री प्रमाणसागर जी, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रमुख शिष्यों में से हैं। अल्पवय में ही अंतर्यात्रा की ओर उन्मुख होने वाले मुनिश्री साधना, संयम और सृजन के सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपका चिन्तन और अभिव्यक्ति कौशल हजारों - हजारों श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर भाव-विभोर कर देता है। धारा प्रवाह प्रवचन में शब्द-सौष्ठव एवं प्रस्तुतिकरण की मोहकता, मधुबन में बांसुरी की भांति प्रभावी है। आप हिन्दी, संस्कृत, प्राकृत एवं अंग्रेजी के अधिकारी विद्वान के रूप में बहु-आदरित हैं। अध्ययनप्रियता, आपका पथ व संयम, आपकी शैली एवं साधना आपकी गुणधर्मिता है। आप आगम के गूढ़तम ज्ञाता, जिणवाणी के प्रखर प्रस्तोता हैं। आपकी बहु प्रशंसित कृति "जैन धर्म और दर्शन" विचार, अध्यात्म एवं चिन्तन - जगत में अनुठे अनुदान की भांति सर्वमान्य है। जैन आगम के गूढ़ तत्त्वों की सहज-सरल-सुबोध प्रस्तुति इस कृति का अनुपम वैशिष्ट्य है। "जैन तत्त्व विद्या" आपकी तत्त्वान्वेशी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है।

संक्षिप्त परिचय

जन्म: २७ जून १९६७
जन्म  नाम: नवीन कुमार जैन
जन्म स्थान:: हजारी बाग ( झारखण्ड)
माता का नाम: श्रीमती सोहनी देवी जैन
पिता का नाम: श्री सुरेन्द्र कुमार जैन 
वैराग्य: ०४ मार्च १९८४
मुनि दीक्षा:   ३१ मार्च १९८८
मुनि दीक्षा स्थान :  सिद्ध क्षेत्र सोनागिरी जी
दीक्षा गुरू: संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी
विशेष : मुनिवर श्री प्रमाणसागर जी की प्रेरणा और परिकल्पना से तीर्थराज सम्मेद शिखर में गुणायतन के नाम से बनने जा रहा यह धर्मायतन जैन धर्म के परम्परागत मंदिरों/धर्मायतनों से एकदम अलग एक अद्भुत ज्ञानमंदिर होगा।
ग्रन्थ लेखन : जैन धर्म और दर्शन ,जैन तत्त्वविद्या ,तीर्थंकर ,धर्म जीवन का आधार,दिव्य जीवन का द्वार,ज्योतिर्मय जीवन आदि

गुरु
आचार्य श्री १०८ विद्या सागर जी महाराज

Muni Shri 108 Praman Sagar Ji Maharaj

 


Brief Introduction

Birth Date 27 June 1967
Birth Place Hajari Bagh (Jharkhand)
Birth Name Naveen Kumar Jain
Mother's Name Shrimati Sohni Devi Jain
Father's Name Shri Surendra Kumar Jain
Vairagya : 04 March 1984
Muni Diksha 31 march 1988
Muni Diksha Guru Aacharya Shri 108 Vidyasagar Ji Maharaj
Muni Diksha Place : Siddha Kshetra Sonagiri Ji
Published Books : Jain Tattv Vidya,Tirthankar,Jain Dhram Aur Darshan,Divya Jeevan Ke dwaar,Jyotirmay Jeevan Etc.


Aacharya
Aacharya Shri 108 Vidya Sagar Ji Maharaj