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SHREE PAPOURAJI MADHYA PRADESH
 श्री पपौरा जी  मध्य प्रदेश

Tirthkshetra's Name:
Shri Digamber Jain Atishaya Kshetra Papouraji
तीर्थ क्षेत्र का नाम:
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पपौराजी
Tirthkshetra's Address:
Shri Digamber Jain Atishaya Kshetra Papouraji
Post– Papouraji ,Tehsil And District – Tikamgarh(Madhya Pradesh)Pin code: 472001
तीर्थ क्षेत्र का पता :
श्री  दिगम्बर  जैन  अतिशय  क्षेत्र  पपौराजी 
पोस्ट – पपौराजी  ,तहसील  और  जिला  – टीकमगढ़ (मध्य  प्रदेश )पिन  कोड : ४७२००१  
Telephone No.
09754516264,09424346145
फ़ोन नंबर :
०९७५४५१६२६४ ,०९४२४३४६१४५
Facilities in Tirthkshetra
Room(Attach Bathroom):50 Room(Seprate Bathroom): 150
Hall :06(Capacity-1000) Guest House: 01
Total Capacity:2000 Canteen/Restaurant : Yes
Dispensary : Yes (AAyurvaedik)  LIbrary: Yes

School : Yes ,Tyagi Vrati AAshram

STD PCO : Yes
क्षेत्र पर उपलब्ध सुबिधाए :
कमरा (स्नानघर संलग्): ५०
कमरा (अलग स्नानघर): १५०
हॉल :०६ (यात्री क्षमता-१००० )
अतिथि गृह :०१
कुल यात्री क्षमता : २०००  भोजनालय : है निशुल्क 
औषधालय: है , आयुर्वेदिक  पुस्तकालय : है

विद्यालय : है

एसटीडी पीसीओ : है
Transportation in Tirthkshetra:
Railway Station :Lalitpur-65 k.m. ,Jhansi-100k.m.,Mahuranipur-60k.m.
Bus stand –Tikamgarh -5 k.m.,Damoh-135 k.m.,Sagar-125k.m.
Easiest Way: Road Way : Vya Teekamgarh-5k.m.
आवागमन के साधन:
रेलवे स्टेशन : ललितपुर -६५  कि .मी . ,झाँसी -१०० कि .मी .,मऊरानीपुर -६० कि .मी . 
बस स्टैंड : टीकमगढ़  -०५  कि .मी .,दमोह -१३५  कि .मी .,सागर -१२५ कि .मी . 
पहुचने का सरलतम मार्ग : सड़क मार्ग टीकमगढ़ से होकर 
Managing Committee :

Trust- Shri Digamber Jain Atishaya Kshetra Papouraji Prabandhkaarini Samiti
President- Shri Komalchand Jain(07683-244698,249328,094248-23545)
Minister- Shri Vijay Kumar Taibraiyya  (098893516688)
Manager-

प्रबंध समिति :

ट्रस्ट : श्री  दिगम्बर  जैन  अतिशय  क्षेत्र  पपौराजी  प्रबंधकारिणी  समिति  
अध्यक्ष:  श्री  कोमलचंद  जैन (०७६८३ -२४४६९८ ,२४९३२८ ,०९४२४८ -२३५४५ ) 
मंत्री :     श्री  विजय  कुमार  (०९८८९३५१६६८८ ) 
प्रबन्धक :

About Kshetra :

No. Of Temple In Tirthkshetra : 108
Hill in tirth kshetra   : No
This Atishaya Kshetra Papouraji is a decent natural place in the center of dense series of high trees surrounded by a vast rampart of 3 km at a distance of 5 km in the east of Tikamgarh. This Kshetra is beautified by the 108 prosperous artistic temples with sky high attractive spires. So many Meru, Matha, Garbha Griha (Basement) and Manastambha make this place more attractive and agreeable. Pampapur is another name of Papoura, near it a dense vast forest is called Ramanna (e.g. Forest of Lord Ram) and it is supposed that Shri Ram Chandraji may have spent some time here during his stay in forests. This Kshetra is more than 800 years old. Here are two underground basements, one of them has three idols. The idol of principal deity Bhagwan Adinath is made of shining Black stone very attractive 2 feet & 8 inch in height. Idols in sides are also in same color & stone. All the three idols were installed in V.S. 1202 and are oldest at this Kshetra. Atishaya – (i) Here exists an ancient little pond. It is said that while a person drop a paper having list of required utensils in this pond, the utensils were received from pond and used by pilgrims. After use & cleaning these utensils were returned to the pond and utensils thus disappeared in water. This miracle is not seen now days because one person did not returned the utensils received from the pond. (ii) Here is a well known as ‘Patrakhan Well’. It is said that an old women organized a party on completion of a big temple (Temple No.-1), suddenly the water of well finished and lack of water for guests was felt. Than that old women entered down in the well reached at the bottom. She than started the prayers with deep heart, a wonder than happened that water started flowing in well and as well as the old woman lifted from the well, the level of water also increased simultaneously. Thus the honor of that old sacred woman was kept. This well is still existing near the mess of school here. (iii) Prayers & worship in temple of basement and in Chandraprabhu Mandir (Temple No.-42) is help full in materializing the desires of pilgrims.

Main Temple & Idol : Four temples are oldest here, Temple No. 5, 7, 41 & 42. Temple in the basement is oldest among these. Temple No. 7 & 41 are Meru Mandir, Meru Mandirs of same style are also seen at Aharji & Sonagiriji constructed in same period. Five temples belong to 17th & 18th century. Remaining temples are constructed letter. Here’s main places are as under: – (i) Prachin Samuchchaya (Ancient Place) – This is the oldest place famous as ‘Sabha Mandapa’. A temple is here in the center and 12 Mathas of old style are surrounding it, looks like 12 assemblies of Samavsharan. (ii) Basement – two underground basements are here at Prachin Samuchchaya, one is very high and vast with 3 rooms, one room is 22 feet X 9 feet in size. (iii) Chaubeesee Mandir – There are 6 temples in each direction surrounding a big temple, having one idol of Teerthankar installed in each temple. This type of Chaubeesee is rare at other places. (iv) Chandraprabhu Mandir – The principal deity of this temple are Bhagwan Chandraprabhu, the Almond colored idol in standing posture, 7 feet & 3 inch in height, very attractive and miraculous installed in V.S. 1524. 9 idols are installed here more, among them 8 idols seem as old as principal deity. Out of this temple an artistic pavilion is standing on four pillars. (v) Rathakar Mandir (a temple in shape of Chariot) – This 75th temple here, looks very beautiful like a chariot moving fast. (vi) Bahubali Mandir – This is round shaped temple standing on 24 pillars in 225 feet circumference. Lord Bahubali's 15 feet high standing colossus in installed here, at the same pattern as of Shravanbelgola. In this temple, there are installed idol of 24 Teerthankars in 24 tiny temples around the wall. Colors of idols are according the actual color of Teerthankars.

क्षेत्र का महत्व :

क्षेत्र पर मंदिरों की संख्या : ०६
क्षेत्र पर पहाड़ : नहीं है
ऐतिहासिकता : टीकमगढ़ से ५ किलोमीटर दूर सागर टीकमगढ़ मार्ग पर पपौरा जी जैन तीर्थ है ,जो कि बहुत प्राचीन है और यहाँ १०८ जैन मंदिर हैं जो कि सभी प्रकार के आकार मैं बने हुए जैसे रथ आकार और कमल आकार यहाँ कई सुन्दर भोंयरे है |
इस क्षेत्र में मंदिर रचना-शिल्प और कलात्मकता की दृष्टि से अदितीय है | पत्थरों पर खुदाई इतनी स्पस्ट है कि मनो कलाकारों ने पत्थर को मोम बनाकर सांचे में ढाल दिया हो | इन मंदिरों में खजुराहो कि तरह पाषाण प्रतिमाओं की कलात्मकता देखते ही बनती है | वास्तुकला का अद्भुत स्वरुप -: पपौरा क्षेत्र पर जो चौबीसी बनी है वह भारत वर्ष मे अन्यत्र देखने को नहीं मिलती | इसमें एक बड़े मंदिर के चारों ओर प्रत्येक दिशा में ६-६ मंदिर हैं | प्रत्येक वेदिका की अलग से परिक्रमा को चतुर्दिक झरोंखों के रूप मैं जिस तरह से निर्मित किया गया है, वह वास्तुकला का अद्भुत नमूना है |
प्राचीन समुच्चय /सभा मंडल -: पपौरा क्षेत्र का यह सर्बाधिक प्राचीन स्थान है जिसे प्राचीन समुच्चय या सभा मंडल के नाम से जाना जाता है | इसके मध्य में एक मंदिर है,उसके चारों ओर बारह कलात्मक मठ हैं समवशरण की सभों के घोतक हैं इसे देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि यह प्राचीनकाल में तपोभूमि रहा होगा , जहाँ पर साधुजन निवास करते होंगे |
प्राचीन भोंयरे -: प्राचीन समुच्चय के समीप दो विशाल भोंयरे(भू-गर्भ स्थित मंदिर)हैं,जिसमे संवत १२०२ की अत्यंत प्राचीनतम प्रतिमाएँ हैं जो देशी पाषाण से निर्मित होते हुए भी अपनी चमक ओर आकर्षण से ९०० वरस बाद भी मानव को आश्चर्यचकित कर देते हैं |
भगवान पार्श्वनाथ की दुर्लभ प्रतिमा -: दुर्लभ पद्मावती सयुक्त पार्श्वनाथ की अद्वतीय कलात्मक प्राचीन प्रतिमा जिसके चारों ओर चित्र बने हुए हैं अत्यंत मनोज्ञ है | इस प्रतिमा के सोंदर्य को देखकर भक्त आश्चर्य चकित रह जाते हैं |
रथाकार मंदिर -: यह मंदिर मुख्यद्वार पर बना हुआ है दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि भव्य रथ में जोते हुए घोडे तेजी से दोड़ते हुए जा रहे हों | वास्तव में यह मंदिर भक्ति से ओत -प्रोत मानवों को मुक्तिरमा से मिलाने के लिए रथाकार रूप में बनाया गया है |
बाहुबली मंदिर -: इस मंदिर का निर्माण कुछ समय पूर्व हुआ था | २२५ फीट के गोल घेरे में २४ खंभों पर गोल मंदिर है, जिसमे १८ फीट उत्तुंग श्री बाहुबली भगवान कि अत्यंत मनोज्ञ प्रतिमा श्रवनबेलगोला स्थित बाहुबली कि स्मृति दिलाती है | मूर्ति के चेहरे पर झलकता हुआ अनिध सोंदर्य अपरिमित शांति प्रदान करता है | भव्य आत्माएं इस प्रतिमा के दर्शन कर अपरिमित शांति का अनुभव करती हैं इसके चारों ओर चौबीसी स्थित है |
बावडी का दान -: क्षेत्र पर एक अत्यंत प्राचीन बावडी है जो पूर्व में सदैव ऊपर तक जल से भरी रहती थी , उस समय जब किसी यात्री को भोजन के लिए बर्तनों की जरूरत होती थी तो वह एक लिखित पर्चा बावडी में डाल देता था और बर्तन ऊपर आ जाते थे ये बर्तन अत्यंत सुन्दर और चमकदार होते थे | एक दिन एक लालची व्यक्ति ने इन बर्तनों की सुन्दरता पर मुग्ध होकर उन्हें घर लेकर चला आया तभी से बावडी ने दान देना बंद कर दिया | लकिन अभी भी जो लोग अत्यंत भरोसे और भक्ति से जो भी कामना इस बावडी से करते हैं वह अवश्य ही पूरी होती है |
पतराखन कुआं -: यह घटना विक्रम संवत १८७२ की है एक वृद्धा माँ के द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया | इस मांगलिक बेला पर अपर जनसमूह को प्रीतिभोज दिया जा रहा था | पानी की पूर्ति कुओं के खली हो जाने के कारण असंभव सा प्रतीत होने लगा | पानी के अभाव से लोग व्याकुल होने लगे और वृद्धा माँ के सम्बन्ध में अनर्गल बोलने लगे | वृद्धा माँ अत्यंत दुखी होकर रोने लगी | परन्तु तुंरत ही उसने प्रतिज्ञा ली की जब तक पानी की व्यवस्था नहीं हो जाती मैं अन्न-जल ग्रहण नहीं करूंगी ऐसा कहकर वह कुँए की टलती में समाधी अवस्था में बैठ गई परन्तु कुछ ही समय में कुँए में पानी के अनेकों स्रोत फूट निकले और वह वृद्धा माँ उस पानी के साथ ऊपर आती गई | यहाँ तक की पानी कुँए से बाहर आ गया | उपस्थित जनसमूह द्वारा प्रार्थना करने पर ही पानी कुँए से निकलना बंद हुआ | तभी से यह कुआं पतराखन के नाम से जाना जाता है |
श्री दयोदय पशु सेवा केंद्र गौशाला, पपौरा (टीकमगढ़) म.प्र. स्थापना - ०९.१२.२००१, शिलान्यास, मुनिश्री समतासागरजी, ससंघ

Nearest Tirth & Visit Place :

AAhar ji-25 k.m. ,                       Drongiri-65k.m.                       Nainagiri-100k.m.
Devgarh-95k.m.                          Kundalpur-180k.m.                 Seron ji-120k.m.
Sonagiri ji- 140 k.m.                    Pavagir-70k.m.                       Thuvon ji-120k.m.

Chanderi ji-120k.m.

निकटतम तीर्थ क्षेत्र :

आहार जी -२५ कि .मी . ,             द्रोणगिरी -६५ कि .मी .             नैनागिरी -१०० कि .मी .
देवगढ -९५ कि .मी .                   कुण्डलपुर -१८० कि .मी .          सेरोन  जी -१२०कि .मी .
सोनागिरी  जी - १४०  कि .मी .        पवागिर -७० कि .मी .             थुवोन  जी -१२० कि .मी .
चंदेरी जी -१२०कि .मी .

Nearest Main City:

Tikamgarh-05k.m.

निकटतम प्रमुख क्षेत्र :

टीकमगढ़  -०५  कि .मी