7) UTTAM Tap उत्तम तप धर्म :(Uttam Tap meaningSupreme Austerity) External View: This does not only mean fasting but also includes a reduced diet, restriction of certain types of foods, avoiding tasty foods, etc. The purpose of penance is to keep desires and passions in control. Over-indulgence inevitably leads to misery. Penance leads to an influx of positive Karmas.
Internal View: Meditation prevents the rise of desires and passions in the Soul. In a deep state of meditation the desire to intake food does not arise. The first Tirthankara, Adinatha Bhagwan was in such a meditative state for six months, during which he observed Niscaya uttama tapa. Only from the meditative energy from within, he went on for six months with no food.

उत्तम तप धर्म:
समस्त रागादी परभावों की इच्छा के त्याग द्वारा स्व-स्वरुप में प्रतापन करना-विजयन करना तप है| तात्पर्य ये है की समस्त रागादी भावों के त्यागपूर्वक आत्मस्वरूप में - अपने में लीं होना अर्थार्थ आत्मलीनता द्बारा विकारों पर विजय प्राप्त करना तप है|
करोडो जन्मो तक तपस्या करने पर भी उसने कर्मो का नाश नहीं होता जितना की ज्ञान के साथ मन वचन काय की संयम से तपस्या करने पर एक साथ करोडो कर्म सिर्फ एक क्षण मात्र में नष्ट हो जाते है ! बिना सम्यकदर्शन - सम्यकज्ञान के कितनी बार तपस्या की, लेकिन आत्म ज्ञान के बिना सुख नाम मन्त्र का नहीं मिला !