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गणिनी प्रमुख १०५ श्री विशुद्धमती माताजी


संक्षिप्त परिचय

जन्म: माघ सुदी दोज दिन सोमवार संवत २००५ शाम ५ बजे
जन्म  नाम:  
जन्म स्थान:: लश्कर ग्वालियर
माता का नाम:  
पिता का नाम:  
ब्रह्मचर्य व्रत :  
क्षुल्लिका दीक्षा  
क्षुल्लिका दीक्षा स्थान  
क्षुल्लिका दीक्षा गुरू:  
आर्यिका दीक्षा विक्रम संवत २०२५
आर्यिका दीक्षा स्थान इसरी (सम्मेद शिखर जी )
आर्यिका दीक्षा गुरू: आचार्य श्री निर्मल सागर जी
गणिनी प्रमुख पद संवत २०२८
गणिनी प्रमुख पद स्थान
गणिनी प्रमुख पद गुरू: आचार्य श्री विमल सागर जी( भिंड )

आचार्य श्री निर्मल सागर जी के गुरु आचार्य श्री १०८ विमल सागर जी (भिंड )ने आपकी तीक्ष्ण बुद्धि को देखकर संवत २०२८ को आपको गणिनी पद से सुशोभित किया तथा शुभाशीष दिया कि आपके द्वारा धर्म का प्रसारण आगमानुसार हो।गणिनी पद से सुशोभित होकर आपने कई भव्य जीवों को आर्यिका दीक्षा प्रदान की ।आर्यिका में सबसे प्रथम दीक्षा देने का सौभाग्य भी आपको प्राप्त हुआ। अर्थ का अनर्थ करने वाली आगम विरुद्ध फ्लू की बीमारी को आपने प्रवचन में आगम प्रमाण रूपी दवाई देकर उसे दूर किया ।आपके गुण से प्रभावित होकर समय समय पर आपको कई उपाधियाँ प्रदान की गयी ।

पद स्थान प्रदान कर्ता
विदुषी गणिनी पद कैलाश नगर दिल्ली संवत २०२६
गणिनी पद सांगोद कोटा संवत २०२८ आचार्य श्री १०८ विमल सागर जी (भिंड )
सम्यग्ज्ञान शिरोमणि एटा उ.प्र. सन १९८२ समाज द्वारा
कुशल आगम वक्ता महावीर जी सन १९८६ समाज द्वारा
वात्सल्य मूर्ति मालपुरा सन १९८७ समाज द्वारा
सिद्धांत रत्न कोटा सन १९९२ आचार्य सन्मति सागर जी
सर्वाधिक दीक्षा प्रदात्री कुचामन सिटी सन १९९३ आर्यिका विनीत मति जी की दीक्षा पर
प्राचीन धर्म रक्षिका चम्लेश्वर सन १९९४ श्रेष्ठी एवं समाज द्वारा
रत्नत्रय चन्द्रिका धारियाबाद सन १९९९ श्रेष्ठी एवं समाज द्वारा
प्राचीन संस्कृति रक्षिका गिरनार जी सन १९९७ आचार्य श्री निर्मल सागर जी द्वारा
२०वी सदी की प्रथम ब्रा. गणिनी मालपुरा सन १९९९ स्वर्ण जयंती पर समाज द्वारा
प्राचीन आगम संरक्षिका शिकोहाबाद सन २००१ आचार्य श्री निर्मल सागर जी द्वारा
चरित्र चुडामणि अवागढ़ २००४ आचार्य श्री निर्मल सागर जी द्वारा
चारिता महोदधि धर्मपुरा देहली आचार्य सन्मति सागर जी द्वारा
सम्यग्ज्ञान दीपिका धर्मपुरा देहली आचार्य श्री निर्मल सागर जी द्वारा
विशेषताए : यह संघ महिलाओं का ही है ,इस संघ में सभी बहने बाल ब्रह्मचारिणी है।पूज्या गणिनी माता जी अनुशासन प्रिय ,प्राचीन संस्कृति की परम रक्षिका ,भौतिकता से परे ,वात्सल्यमयी एक अनन्य ही गुरु है।
ऐसी पूज्या आर्यिका विशुद्धमति माता जी हम सभी के बीच शतायु एवं दीर्घायु प्राप्त कर धर्म वाणी का श्रवण कराती रहे जिससे संसार में भटकते प्राणी अपना उद्धार कर नर जन्म को सफल कर सके ।
ऐसी पूज्या आर्यिका विशुद्धमति माता जीके चरणों में शत शत बार वन्दामि वन्दामि वन्दामि .....................................................................................वन्दामि वन्दामि वन्दामि वन्दामि

गुरु
आचार्य श्री निर्मल सागर जी

Ganini Pramukh Aryika Shiromani 105 Aryika Vishuddhamati Mataji

 


Brief Introduction

Birth Date Maagh Sudi 2,Monday ,Vikram Samvat 2005
Birth Place Lashkar Gwalior
Birth Name  
Mother's Name  
Father's Name  
Brahmcharya vrat :  
Kshullika Deeksha :  
Kshullika Deeksha Guru :  
Kshullika Deeksha Place :  
Aryika Deeksha Vikram Samvat 2025
Aryika Deeksha Guru Acharya Shri Nirmalsagar Ji Maharaj
Aryika Deeksha Place : Isri Saamedh Shikhar Ji
Website : http://www.maavishudhmati.com/


Aacharya
Aacharya Shri 108 Nirmal Sagar Ji Maharaj